रविवार, 2 अक्टूबर 2022
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शहीद का प्यार
वो फूलों वाले दिन थे जब साथ मेरा तुम छोड़ गये वो मिलने वाले दिन थे तब साथ मेरा तुम छोड़ गये हे प्रिये, क्षमा, तुमसे मैं इजहा...
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वो फूलों वाले दिन थे जब साथ मेरा तुम छोड़ गये वो मिलने वाले दिन थे तब साथ मेरा तुम छोड़ गये हे प्रिये, क्षमा, तुमसे मैं इजहा...
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कसक समर्पण की जो संध्या थी वो तेरी और मेरी थी तेरे अंजुल के ऊपर में मेरी अंजुल अकेली थी वो फेरों के सफर में भी कसक मेरी अधुरी थी बिदाई के ...
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क्योंकि मैं व्हीलचेयर में हूँ मैं तुमसा दौड़ नहीं सकता तो क्या, दौड़ में अब हिस्सा भी ना लुं। मैं तुमसा खेल नहीं सकता तो क्या, ख...

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