गुरुवार, 30 जुलाई 2020
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शहीद का प्यार
वो फूलों वाले दिन थे जब साथ मेरा तुम छोड़ गये वो मिलने वाले दिन थे तब साथ मेरा तुम छोड़ गये हे प्रिये, क्षमा, तुमसे मैं इजहा...
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कसक समर्पण की जो संध्या थी वो तेरी और मेरी थी तेरे अंजुल के ऊपर में मेरी अंजुल अकेली थी वो फेरों के सफर में भी कसक मेरी अधुरी थी बिदाई के ...
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वो फूलों वाले दिन थे जब साथ मेरा तुम छोड़ गये वो मिलने वाले दिन थे तब साथ मेरा तुम छोड़ गये हे प्रिये, क्षमा, तुमसे मैं इजहा...
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ऐ दोस्त मेरे अब तु भी आ चल पकड़ हाथ, अब साथ साथ स्कूल की सीढ़ी चढ़ते हैं तु तिपहिए पर मै दो पैरों से चल इक दौड़ लगाते हैं चल टिफीन...

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